भारत में अंग्रेजों को सत्ता दिलाने वाले क्लाइव की मूर्ति हटाने की मांग, ऑनलाइन पिटीशन पर 1700 लोगों ने दस्तखत किए
18वीं सदी में ईस्ट इंडिया कंपनी के जरिए भारत को गुलामी के दलदल में धकेलने में अहम भूमिका निभाने वाले रॉबर्ट क्लाइव की मूर्ति हटाने की मांग तेज हो गई। क्लाइव की ये मूर्ति लंदन के श्र्यूसबेरी में है। मूर्ति हटाने के लिएऑनलाइन प्लेटफॉर्म change.org के जरिए सोमवार कोएक पिटीशन श्रोपशायर काउंटी काउंसिल को भेजी गई। एक घंटे में इस पर 1700 लोगों ने दस्तखत यानी सिग्नेचर किए। यह मुहिम अश्वेतों के समर्थन में चलाई जा रही है।
पिटीशन के मुताबिक, क्लाइव भारत समेत दक्षिण पूर्व एशिया में ब्रिटिश हुकूमत का विस्तार करने वाले शुरुआती लोगों में था। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान इन देशों में लाखों निर्दोष लोगों की हत्या हुई, उन पर जुल्म हुए। ऐसे में ब्रिटिश राष्ट्रवाद का जश्न मनाने के लिए उनकी मूर्ति लगाना गलत है। पिटीशन में ब्रिटिश हुकूमत के समय बंगाल और भारत के संसाधनोंको लूटने में क्लाइव की भूमिका बताई गईहै।
सांसद ने शांति से चर्चा करने की अपील की
श्र्यूजबरी के सांसद डेनियल कॉजिंस्की ने इस मुद्दे पर शांतिपूर्ण ढंग से चर्चा की अपील की। कहा, “मैं हाउस ऑफ कॉमन्स के जरिए क्लाइव के जीवन पर रिसर्च करूंगा। जब तक रिसर्च पेपर तैयार नहीं हो जाता, मैं उन पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।हम ब्रिटिश शासन स्थापित करने में मदद करने वालों का सम्मान करते हैं। वे हमारे इतिहास का हिस्सा हैं। मैं जानता हूं कुछ लोग ब्रिटिश शासन के इतिहास से जुड़ी चीजों को मिटाना चाहते हैं।लेकिन, मैंने दुनिया भर में इसके हक में हुए बहुत सारे काम भी देखे हैं।”
चर्चिल और कॉल्स्टन की मूर्ति को नुकसान पहुंचाया गया था
ब्रिटेन में कुछ दिनों से अश्वेतों के समर्थन में प्रदर्शन हो रहे हैं। रविवार कोप्रदर्शनकारियों ने दूसरे विश्व युद्ध में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहे विंस्टन चर्चिल की मूर्ति को नुकसान पहुंचाया था। लंदन केपार्लियामेंट स्क्वेयर पर लगी उनकी मूर्ति पर लिख दिया था- वे नस्लभेदी थे। इसके साथ ही विरोध करने वालों ने 17वीं सदी के ब्रिटिश मानव तस्कर (स्लेव ट्रेडर) एडवर्ड कॉल्स्टन की मूर्ति तोड़ दी, इसे नदी में फेंक दिया। कॉल्स्टन 17वीं शताब्दी में अफ्रीकी लोगों को अमेरिका और दूसरे देशों में बेचता था।
कौन थेरॉबर्ट क्लाइव?
रॉबर्ट क्लाइव ईस्टइंडिया कंपनी के कर्मचारी थे। 1757 में प्लासी और 1764 में बक्सर की लड़ाई जीतने में उनकी अहम भूमिका थी।इसके बाद ब्रिटिशों का भारत में पैर जमाने का रास्ता साफ हो गया। इससे पहले तक ब्रिटिश भारत में कारोबारी के तौर पर रह रहे थे। क्लाइव बंगाल प्रेसिडेंसी के पहले गवर्नर थे। क्लाइव की मौत 22 नवम्बर को 1774 को हुई। इस वक्त उसकी उम्र सिर्फ28 साल थी।भारत में उसने न सिर्फ ब्रिटिश शासन को मजबूत बनाया बल्कियहां से कई कीमती सामान ब्रिटेन भी ले गया।
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